पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ हर थाने में चाहिए, वर्दी की लाज बचाने वाली एक ‘रेवती’

Salute to HC Revati for her bravedo and justice

NBC digital , Lucknow

झकझोर देने वाले पुलिसिया सितम का यह मामला तमिलनाडु के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में वर्ष 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान का है। जहां व्यापारी पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) की हिरासत में क्रूर यातना देकर हत्या कर दी गई थी। मामले में मदुरै की पहली अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने एक दुर्लभ फैसला सुनाया।

19 जून 2020 को लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में बेनिक्स को सथानकुलम पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया। सूचना पाकर थाने पर पहुंचे बेटे जयराज को भी पुलिस ने अरेस्ट कर लिया।दोनों पर मोबाइल शॉप खुली रखने का आरोप लगाया गया। हिरासत में दोनों को इतनी क्रूर यातना दी गई कि बेनिक्स की 22 जून को और जयराज की 23 जून को मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों और खून बहने के निशान मिले।

मामले में शुरू में स्थानीय पुलिस और सीबीआई-सीआईडी की हुई जांच बेनतीजा और एकतरफा रही। लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद सीबीआई को जांच सौंपी गई। सीबीआई ने 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक की बाद में कोविड से मौत हो चुकी है।

रेवती की साहसिक गवाही निर्णायक साबित हुई

इस फैसले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना हेड कांस्टेबल एस. रेवती की गवाही। उस रात सथानकुलम थाने में ड्यूटी पर तैनात रेवती ने धमकियों, संस्थागत दबाव और सहयोगियों की अवहेलना करते हुए मजिस्ट्रेट एम.एस. भरथिदासन के सामने पूरी घटना का खुलासा किया।

रेवती के अनुसार, वह रात साढ़े आठ बजे करीब पुलिस स्टेशन आई तो एक कमरे से चीखने की आवाजें आ रही थीं। उस समय पुलिसकर्मियों ने पिता-पुत्र को लाठियों और जूतों से बुरी तरह पीटा। प्रताड़ना इतनी वीभत्स थी कि उनके निजी अंगों को भी नहीं बख्शा गया और बूटों से दोनों के प्राइवेट पार्ट पर मारा।

मारपीट के बीच पुलिसकर्मी शराब पीने के लिए रुकते और फिर दोगुने उत्साह से पिता-पुत्र पर हमला करते। इतना ही नहीं गंभीर रूप से घायल पीड़ितों से ही फर्श पर फैला उनका खून साफ करवाया गया।

आगे रेवती ने बताया कि जब जयराज और फेनिक्स अर्ध-बेहोशी की हालत में थे, रेवती ने उन्हें कॉफी देने की कोशिश की, जिसे अन्य पुलिसकर्मियों ने फेंक दिया। उन्हें नग्न कर बांध दिया गया था। रेवती ने न केवल यह भयावह सच मजिस्ट्रेट को बताया, बल्कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान भी की।

रेवती ने अपने सहयोगियों के खिलाफ गवाही देकर न केवल न्याय की जीत सुनिश्चित की, बल्कि पुलिस बल में जवाबदेही की मिसाल भी पेश की। उन्होंने बाद में कहा कि ‘कानून के सामने सब बराबर हैं’ और इसीलिए उन्होंने सच बोलने का फैसला किया, भले ही इसमें अपनी और परिवार की सुरक्षा को खतरा हो। आज पूरे।देश में रेवती के इस साहस की चर्चा है।

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